सबरीमाला श्री अय्यप्पा मंदिर | Sabarimala Temple

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Sabarimala Temple – सबरीमाला श्री अय्यप्पा मंदिर भगवान अय्यप्पा का मंदिर है। यह मंदिर केरल के पथानामथित्ता जिले में स्थित है। यह मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर को हजारों साल पहले बनवाया गया था। इस मंदिर की बहुत सारी जानकारी अन्य देशो के प्रवासी के किताबो में भी मिल सकती है।

सबरीमाला श्री अय्यप्पा मंदिर – Sabarimala Temple

एक पौराणिक कहानी के अनुसार एक बार परशुराम ऋषि समुद्र के रास्ते से केरल पहुच गए थे। उन्हें केरल राज्य की रक्षा करनी थी इसीलिए उन्होंने एक मंदिर बनाने का विचार किया था और उसके बाद ही जल्द उन्होंने इस मंदिर को बनवाया। इस मंदिर की एक और खास बात यह है की इस मंदिर में किसी भी धर्म और जाती का व्यक्ति आ सकता है।

सबरीमाला मंदिर का इतिहास – Sabarimala Temple History

एक पौराणिक कथा के अनुसार इस मंदिर को एक योद्धा ऋषि परशुराम ने बनवाया था जब वह समुद्र से केरल की तरफ़ आ रहे थे। उन्होंने केरल की रक्षा करने के लिए और पंच्शास्था के अनुसार इस मंदिर को बनाया था। इस मंदिर में अय्यप्पा को एक ‘ब्रह्मचारी’ के रूप में पूजा की जाती है क्यों की वह यहा के जंगल में एकांतवास में केवल ध्यान धारणा करना चाहते थे।

केरल का यह सबरीमाला मंदिर बहुत ही विशेष मंदिर है क्यों की इस मंदिर में किसी भी धर्मं किसी भी जाती का व्यक्ति आ सकता है। इस मंदिर में आने वाले किसी भी तीर्थयात्री को अय्यप्पा समझकर उसे मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति है फिर वह किसी भी जाती, धर्मं का हो इससे कुछ भी फरक नहीं पड़ता।

इस मंदिर को सुचारू रूप से चलाने का काम त्रावनकोर देवसोम बोर्ड करता है। इस मंदिर के महत्व और तत्वमसि को बनाये रखने की जिम्मेदारी भी इस बोर्ड पर सौपी गयी है। इस सबरीमाला मंदिर के बाजु में एक सूफी संत वावर की समाधी भी है।

वह सूफी संत इस मंदिर के भगवान अय्यप्पा का मित्र था और आज सभी उस सूफी संत को ‘वावारुनाडा’ नाम से बुलाते है।

इस मंदिर को बनाते वक्त बहुत ही खास तरीके से बनाया गया था क्यों की आज भी यह मंदिर आज के आधुनिक मंदिरों की तरह ही आकर्षक दीखता है। इस मंदिर को बनाते समय सभी आधुनिक तकनीक का पूरा इस्तेमाल किया गया है। जिसकी वजह से यह मंदिर बिलकुल नए मंदिर की तरह ही दीखता है।

सबरीमाला मंदिर आने का समय – Time to visit Sabarimala Temple

भगवान अय्यप्पा का यह मंदिर साल में केवल कुछ खास समय के लिए ही खुला रहता है। सभी तीर्थयात्री इस मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए नम्वंबर और जनवरी के बिच में ही आते है।

इस समय के दौरान मंडलपूजा के दौरान, जनवरी में मकरसंक्राति के समय और अप्रैल महीने मे महा विशुअ संक्रांति और मलायलम के हर महीने के पहले पाच दिन मंदिर को खुला रखा जाता है।

मगर यहापर आने से पहले भक्तों को कुछ कठिन नियमो का पालन करना जरुरी है जैसी की 41 दिनों तक उपवास करना पड़ता है, शारीरिक भोग से दूर रहना पड़ता है, केवल शाकाहारी भोजन का सेवन की करना पड़ता है, शराब पीना मना है, धुम्रपान को छोड़ना पड़ता है और बालो को काटना भी मना है।

इस मंदिर मे केवल पुरुषो को ही आने की अनुमति है। किसी भी महिला को इस मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता।

सभी भक्त पुराणी परंपरा के अनुसार ही इस मंदिर में बिना कोई चप्पल पहने जंगल में से नंगे पैरों से ही मंदिर में आते है और मंदिर में आने से पहले रास्ते में आनेवाली पम्पा नदी में स्नान करके ‘स्वामी अय्यापो’ मंत्र का जप करके ही मंदिर में प्रवेश करते है।

इस तरह से यहापर ऐसा लगता है की कोई बड़ा त्यौहार मनाया जा रहा हो। पम्पा नदी में स्नान करने के बाद सभी तीर्थयात्री ट्रेकिंग की सहायता से सबरीमाला मंदिर तक पहुचते है। सभी भक्त अपने विश्वास को बनाये रखने के लिए और परम्परा के अनुसार ही इस मंदिर में केवल काले कपडे या फिर नीले कपडे पहनकर ही भगवान के दर्शन करते है।

इस मंदिर के भगवान अय्यपा ने ब्रह्मचारी के रूप में अवतार लिया था। इसीलिए इस मंदिर में आने के लिए किसी भी भक्त को कड़े नियमो का पालन करना पड़ता है। सबसे पहली बात यह है की किसी भी भक्त को इकतालीस दिनों का उपवास करना पड़ता है।

यह मंदिर पुरे साल भर खुला नहीं रखा जाता। मगर कुछ खास त्यौहार के अवसर पर ही इस मंदिर को खुला रखा जाता है। इस मंदिर में आने वाला हर भक्त अपने पैरों पर चलकर ही मंदिर में आता है और रास्ते में जो पम्पा नदी आती है उसमे स्नान करने के बाद ही भक्त भगवान अय्यप्पा के दर्शन करते है।

यह मंदिर नवम्बर दिसंबर और मकरसंक्रांति के अवसर पर ही इस मंदिर को खुला रखा जाता है और साल के अन्य दिनों में इस मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता।

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